बिहार - वर्णन


स्वर्ग से 'श्री लक्ष्मी' जब विलीन हुई

 देवों की परम शक्ति क्षीण हुई

 पर्वत मैं अमृत मथनी मंदार हूँ ;

हाँ मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ


जो व्योमवासी को भी दे भिक्षा दान

हर्ष से मित्रता पर दे दे प्राण

अंगराज कर्ण का मैं दरबार हूँ ;

हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ |


जो धर्मराज युधिष्ठिर के राजसूय की राह में रोड़ा था 

 जिसके भय से भगवान श्री कृष्ण ने भी मथुरा छोड़ा था

 मगध नरेश जरासंघ की ललकार हूँ ;

हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ |


महिलाओं का जहां सदा मान

मैत्रेयी से भला कौन अनजान

संस्कृति का मैं समृद्ध भंडार हूँ ;

हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ |


अशोक ,कबीर और रहीम का जन्मदाता

शौर्य और ज्ञान समेटे मैं हीं देश का माथा

संत सिपाही गुरु गोविंद सा सरदार हूँ ;

हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ |


याद है जब मौय॔ ने उत्तर मे पाँव बढ़ाया था

देख इनका शौय॔ पूरा जग घबराया था

इस मिट्टी का हीं चंद्रगुप्त औ बिंदुसार हूँ ;

हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ |


ग्रीक सम्राट सेल्यूकस निकेटर को भी हराया था

प्रांत की बात छोड़ो बेटी भी ब्याह लाया था

वही पशि॔या तक का विजयी तलवार हूँ ;

हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ |


 देशभक्ति को मैंने ही पहली बार साधा था

पूरे भारतवर्ष को एक सूत्र मैं बांधा था

वैसा मैं ज्ञानी चाणक्य राज्य- शिल्पकार हूँ ;

हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ |


मैंने ही बुद्ध को बनाया भगवान था

यहीं चक्रवर्तिन अशोक हुआ महान था

हाँ हाँ मैं महावीर का भी अवतार हूँ;

हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ |


मुगलिया सेना भी जिसके समक्ष मांगे पानी 

सम्राट को पड़े गंगा में कुदकर जान बचानी

वही सासाराम के शेरशाह की दहाड़ हूँ ;

हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ |


 सैकड़ों गोरों के सामने अकेला अड़ा था

सत्तर की उम्र में भी जो युद्ध लड़ा था

 तोपों पर भारी कुवँर की प्राचीन कटार हूँ ;

हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ|


 जहाँ जनक नंदिनी सीता का जन्मभू

चाकरी करे उगना बन स्वयं शिव शंभू

पित्तरों का भी करता तारणहार हूँ ;

हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ|


 दुनिया को राजनीति का दिया मूलमंत्र

 पहल कर वज्जि का पहला लोकतंत्र

ऐसा उन्नत उचित कल्याणकारी विचार हूँ ;

 हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ|


 सुश्रुत का शल्यविज्ञान या बाल्मीकि का रामग्रंथ

या आर्यभट्ट का गणित हो वात्सायन का कामग्रंथ

राष्ट्रकवि दिनकर जैसा कलमकार हूँ ;

हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ|


नागार्जुन, रेणु,नेपाली व बेनीपुरी मेरी संतान

हिंदी को है हमेशा जिन पर अभिमान

साहित्य सागर का मैं कर्णधार हूँ ;

हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ |


विद्वानों की यह पावन धरा

साहित्य संगीत कला से भरा 

मधुबनी सा प्रसिद्ध चित्रकार हूं ;

हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ|


भिखारी जैसा अभिनय का ताज

स्वर कोकिला शारदा की आवाज

 बिस्मिल्लाह खान सा धुनकार हूँ ;

हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ|


बोधगया की अनुपम शांति भी हूँ

सन्यासियों की उग्र क्रांति भी हूँ

आंदोलन की पहली बयार हूं ;

हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ|


 शासन जब जब निरंकुश बन बौखलाया है

 सत्ता से उतार कर मैने हीं राह दिखाया है

 राजेंद्र जयप्रकाश का जन पुकार हूँ ;

 हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ|


मंदिर मस्जिद मठ चैत्य और आश्रम

सब धर्म का है यह अनोखा संगम

सभ्यता का सम्यक द्वार हूं ;

हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ|


जहाँ खाजा तिलकुट लिची आम मालपुआ के मिठास की मस्ती है

 सतुआ लिट्टी चोखा दही चुडा और खजूरी में जान बसती है

 इन्ही से मनाता अपना त्योहार हूँ ;

हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ|

 

मुझमें पत्नी प्रेम का माँझी दशरथ हठ

मुझमें हीं प्रकृति पूजन महापव॔ छठ

जिद आस्था प्यार और संस्कार हूँ ;

हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ|


खाली जेबे आंखों में ख्वाब भरपूर

सब छोड़ चला आता हूं मैं घर से दूर

हर शहरो का छोटा बाजार हूँ ;

हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ|


 श्रम से ना कभी शरमाया जरा 

कर्म से किंचित न कतराया , डरा

प्रेम से कर लेता हर रोजगार हूँ ;

हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ|


नवयुग में जब दुनिया ने खुद को गहा

 यद्यपि कि मेरा मैं हम हीं रहा

हूँ 'भइया जी' सब का रिश्तेदार हूँ ;

हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ|


हिमालय का मैं पग पटल

गंगा का मैं लहराता आँचल

माँ भारती का श्रृंगार हूँ ;

हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ|


ककोलत का ठंडा शीतल जल 

पर कुंडो में है समाहित अनल

प्रकृति का अद्भूत समाहार हूँ ;

हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ|


माना कि थोड़ा कलुषित है मेरा वर्तमान 

देवों के भी न होते दिन एक समान

पर भविष्य के लिए मैं तैयार हूँ ;

हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ|


अभिशाप नहीं है मेरी आबादी

दगाबाज है तो केवल खादी

सिस्टम का सौतेला व्यवहार हूँ ;

हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ|


कल का मैं प्रबल दावेदार हूँ ,

सम्मान का मैं भी हकदार हूँ ,

प्रगति का भी मैं हिस्सेदार हूँ ,

हां मैं गरिमामय गौरवशाली बिहार हूँ|


                  ©®रितेश