
रास्ते को रोटी से लपेट कर खा गया समय का चौकीदार,
और छोड़ गया अपनी कुर्सी पे रखे घिसे पिटे जूते ,
पास में खड़ी ग्रीष्म की लालटेन में तेल डालने आयी बारिश ने,
बहा दिए किस्से किताबें और मेज़ पे रखे कांच के टुकड़े,
दुनिया सिमट कर एक नहर में लगी,
जहां से ताजे फलों के रास पर झिलमिलाती एक मधुमक्खी डेरा बना लिया,
क
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