मुन्नी 

उत्सुकता के पेंग बढ़ाकर ,
मुन्नी भागी खेल छोड़कर ।
बेंत से यह क्या बुनते ,
टूटी कुर्सी के भाग्य पलटते।
 अंकल ,मुझे भी सीखा दो ,
मुझमें भी गुण जगा दो ।
अंकल ने गोद में बिठाया ,
मुन्नी का फूलदार फ्राक सहलाया ।
बेंत का गोला पड़ा है पीछे ,
अंकल ढूंढें फ्राक के नीचे ??

आज बहुत ज्यादा सर्दी है ,
सूरज को घर जाने की जल्दी है ।
मुन्नी भी कुलांचे भरती ,
मां के आगे दौड़ रही है ।
मां किस आशंका के मारे ,
मुन्नी को बार-बार गुहारे।
 मन्दिर के जोर से बजते घंटे ,
मुन्नी के पैरों में फुर्ती भरते।
दिखे सामने से कोइ भैया आते ,
सीने पर अपना हाथ बांधे ।
मुन्नी के सीने पर झप्पटा मारा ,
मुन्नी का शरीर थरथर कांपा ।
माला का pendant जैसा नजर आया,
इसलिए शर्ट का बटन नोच गिराया ??

मुन्नी अब थोड़ी बड़ी हुई है ,
समझ की खिड़की चौड़ी हुई है ।
हाथों में किताबों को पकड़े ,
दुपट्टे को सलीके से ओढ़े ,
ऑटो स्टैंड पर खड़ी ,
ऑटो की बाट जोह रही है ।
फब्तियाँ सुन, मुन्नी को गुस्सा आया,
मनचले ने दुपट्टा खींच ,हवा में लहराया ।

आज मुन्नी ने साड़ी पहनी है ।
उसके साथ उसका हमजोली है ।
लाल साड़ी ,
लाल बिंदी,
 लाल लाल चूडियां ।

बिखरे बाल,
 टूटी चूडिय़ां ,
तन मन में लाल रंग उबल रहा है।
 भेड़ियों की रक्तिम लालसा ने,
 आँखों में रक्त भरा है ,
आंखों का काजल दिल में उतर रहा है ।