यूं कहें तुम्मे हीं खो जाते हैं
आंखें तो बरस रो जाते हैं
आ तुझे ले चलूं मुहल्ले दिल
तेरे आने से ग़म खो जाते हैं
प्यार के तो यहां वही वर्ण हैं
बस इरादें अलग हो जाते हैं
बोतलों की है ये छुपी खूबी
चेहरे तो वो सभी धो जातें हैं
है न कोई भी काबिल ए नफरत
क्यों तिरे दर सनम वो जातें हैं
लाज़मी था "प्रखर" तिरा आना
आने से अश्क रुक जो जाते हैं
~ प्रखर ओझा


