तुम्हे इश्क़ कहूँ या आदत..?
ख्वाहिश या इबादत..?
जिद या जुनून...?
हक़ या अमानत...?
कहो,
तुम्हे इश्क़ कहूँ या आदत..?
सपना या हक़ीक़त,
रुतबा कहूँ या शोहरत,
नजरें झुक झुक कर कहती अनकही कहानी
और मुस्कुराते होठों पर इतराती चाहत,
कहो,
तुम्हें इश्क़ कहूँ या आदत..?
रिश्तें सम्भालती डोर की तरह
जिंदगी जगाती अल्हड़ शोर की तरह
वक़्त बेवक़्त ये यूं रूठना तेरा
क्या कहूँ इसको,
हुनर या बगावत...
कहो न,
तुम्हे इश्क़ कहूँ या आदत..?
