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सुबह हो या हो शाम

सुबह हो या हो शाम, हर घडी, किसी झरने सा बहता हैं मेरी आँखों का पानी। ना मैं पोखर हूँ,न हूँ कोई नदी, फिर भी सागर को चुनौती दे रहा मेरी आँखों का पानी। याद में तेरी आँखों से ज़मी तक, किसी रेल सा गुज़रता हैं मेरी आँखों का पानी। हर रोज़ जल
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