सुबह हो या हो शाम, हर घडी,
किसी झरने सा बहता हैं मेरी आँखों का पानी।
ना मैं पोखर हूँ,न हूँ कोई नदी,
फिर भी सागर को चुनौती दे रहा मेरी आँखों का पानी।
याद में तेरी आँखों से ज़मी तक,
किसी रेल सा गुज़रता हैं मेरी आँखों का पानी।
हर रोज़ जलता हूँ तेरे इंतज़ार में सूरज की तरह,
हर रोज़ आग बुझाता हैं मेरी आँखों का पानी।
खिलती कलियों को देख खुश होता हैं दिल,
गिरते पत्ते देख मायूस हैं मेरी आँखों का पानी।
मचलती बागबानी और ये महकती खुशबू,
इस तरह बहार लाता हैं मेरी आँखों का पानी।