"मैं रहुंगा फिर खङा"

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क्या हुआ जो आज मैं

हुँ धरा पर पड़ा।

वो मैं ही था जो कल यहां

ताने सीना था खड़ा।


देख लेना कल मुझे

लांघ हर दिवार को,

मोड़ रुख तुफानो का,

शीर्ष पर हिमालय के,

गर्व से फूला हुआ,

कर मस्तिष्क को ऊंचा,

तानकर अपना सीना,

मैं रहुंगा फिर खड़ा!

मैं रहुंगा फिर खड़ा!!