भीगी पलकों से..
नेह टपकता रहा
मोल ना समझा उसने
#बेइंतेहा वफ़ा का
बेपरवाही देख उसकी
सब्र भी बिखरता रहा
पर......
दिल तो दिल जो ठहरा
आशा की किरण में
ख़ुद बख़ुद जलता रहा
मोहब्बत की आकाशगंगा में
उनको फिर भी ढूंढता रहा
भीगी पलकों से..
नेह टपकता रहा......
~PRAHLAD कुमार PUROHIT


