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ग़र


मना लूं तुझे

ग़र.....

तू मान जाए

चुरा लूं तुझे

ग़र.....

तू साथ निभाए

पलकों में बसा लूं

ग़र.....

तू नज़र मिला ले

रुख को चूम लूं

ग़र.....

तू नज़रों को झुका ले

ज़ल्फों को सहलाऊं

ग़र.....

तू मुझको अपना ले

— PRAHLAD कुमार PUROHIT
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