करती हो मोहब्बत तुम मुझसे

ये बात जुबां तक आने दो

बाहों में भर लूँ मैं तुमको

कुछ पल का सूकून तो आने दो ।


जज़्बात बयां करके भी क्या

ऐतबार तो तुमपे आने दो

बेपरवाह बने से फिरते हो

परवाह तो तुम में आने दो।