वषोॅ भर की मेहनत पर पल भर में पानी पड़ जाता है,
तुम्हारे नाम का ग़र कोई शख़्स मिल जाता है।
न चाहकर भी निगाहें जा टिकती है मेरी उस पर,
वो बेचारा बेफिजूल की गलतफहमी में मारा जाता है।
तुम्हारा ख्याल और तुम्हारा शहर कुछ कम तो न था हमदम,
कि तुम्हारा नाम भी मुझ पर गज़ब सितम कर जाता है।


