देखकर जिसकी झील सी आँखे,
सब बस यूँ ही डूबते जाये..
हाय..न जाने क्या होगा उस पगले का!
जिसको ये आँखे देखेंगी..
देखकर जिसकी जुल्फ़ धनेरी,
स्वयं घटा भी शर्माये..
हाय.. न जाने क्या होगा उसका!
जिस पर ये जुल्फें बिखरेंगी..
और सुनकर जिसकी प्यारी बोली,
कोयल भी कुछ खिझ सी जाये..
हाय..न जाने क्या होगा उस दिवाने का!
जिससे वो सब प्यारी बातें होगी..
