सत्ता के मद में चूर,
अधिकारों का हनन, निंदा और
किसी असहाय के निवाले को छीनकर
जब उसकी शक्ति को ललकारते हो।
तो सदैव स्मरण रहे!
उस वक्त असहाय के सामर्थ्य को नहीं
ईश्वरीय सत्ता और ईश्वर के सामर्थ्य को
ललकारते हो।


सत्ता के मद में चूर,
अधिकारों का हनन, निंदा और
किसी असहाय के निवाले को छीनकर
जब उसकी शक्ति को ललकारते हो।
तो सदैव स्मरण रहे!
उस वक्त असहाय के सामर्थ्य को नहीं
ईश्वरीय सत्ता और ईश्वर के सामर्थ्य को
ललकारते हो।