मुझे नही मालूम,
तुम मुझे साहित्य की तरफ खींच कर ले आते हो
या साहित्य मुझे तुम तक खींच कर ले आती है
लेकिन इतना जरूर महसूस किया है
तुम दोनों के बगैर मेरे जीवन की पूर्णता
असम्भव सी प्रतीत होती है।
~ प्रज्ञा शुक्ला


मुझे नही मालूम,
तुम मुझे साहित्य की तरफ खींच कर ले आते हो
या साहित्य मुझे तुम तक खींच कर ले आती है
लेकिन इतना जरूर महसूस किया है
तुम दोनों के बगैर मेरे जीवन की पूर्णता
असम्भव सी प्रतीत होती है।
~ प्रज्ञा शुक्ला