साजन तेरी शराफत पर,
मुझको बहुत है नाज।
पर इतनी शराफत क्या करना,
कि रंग जमे ना आज।
इतने बरस इंतजार किया है,
ऐसी होली का यार।
रंग जाये एक दूजे के रंग में,
करे न्यौछावर प्यार।
साजन तुम बिन होली मेरी,
थी कितनी बेरंग।
आज तुम्हारे संग पिया,
मुझको फीके लग रहे इंद्रधनुष के रंग।
हाय! तुम्हारी यही अदा,
उस पर ये चंचल मुस्कान।
मेरे हृदय पर ना रहने दिया,
स्वयं मेरा अधिकार।


