जिंदगी की सारी कड़वाहटों को भुला रही हूँ,तुम्हारे इश्क़ का एक बूंद जो मिला रही हूँ।सारे तारे जो मुझसे गुफ्तगू को कह रहे है,मेरे चाँद! तुम मेरी खामोशी को समझ रहे हो।
जिंदगी की सारी कड़वाहटों को भुला रही हूँ,तुम्हारे इश्क़ का एक बूंद जो मिला रही हूँ।
सारे तारे जो मुझसे गुफ्तगू को कह रहे है,मेरे चाँद! तुम मेरी खामोशी को समझ रहे हो।