तुमसे अभी मिली तो नही मेरे अजनबी,
कि तुम्हें मन भर देखूँ पर तुम्हारा चेहरा
मेरे हृदय पटल पर अंकित हो चुका है।
तुम्हारा मासूम चेहरा!
तुम्हारे व्यक्तित्व का वो भाग,
जिस पर कविता क्या पूरे ग्रन्थ लिख दिये जाये।
तुम्हारे चेहरे पर झलकता प्रेम..... उफ्फ,
ऐसा प्रतीत होता है।
जैसे.... रचयिता ने सम्पूर्ण संसार के
प्रेम का आधा अंश बचा लिया हो
तुम्हारे चेहरे के लिए।
जब भी सोचती हूँ तुम्हारे चेहरे की उपमा तो,
लगता है तुम्हारे चेहरा शायद वैसे ही हो जैसे
प्रभु श्री राम का जिसे देख पुष्प वाटिका में
देवी सीता मुस्कुराई होगी।
मेरे अजनबी!
शब्दों की छोटी सी दुनिया
समेट नही सकती तुम्हें।

