मुझे तुम्हारा आभाससूर्य के रूप में होता है।जो नित रोज अपनेसिंदूर भरे हाथों सेपृथ्वी को सिंदूरी करता है।इस प्रकार हमारा प्रेमहर युग तक जीवंत है।
मुझे तुम्हारा आभाससूर्य के रूप में होता है।
जो नित रोज अपनेसिंदूर भरे हाथों सेपृथ्वी को सिंदूरी करता है।
इस प्रकार हमारा प्रेमहर युग तक जीवंत है।