बस इतना बता दो कृपानिधान
कब तक बने रहे धैर्यवान
उम्मीद के पथ पर कदम बढ़ाते
अगले क्षण पग है डगमगाते
इसका करो कोई समाधान।
मन में शंकाओं के बादल छाये
जीवन में तूफान ले आये
हमारे दुख का तुमको हो भान
बस इतना बता दो कृपानिधान
कब तक बने रहे धैर्यवान।
कैसी है धनघोर ये छाया
कैसा है ये काल
न जाने कब होगा पुनः सूरज लाल
जीवन में फिर हो सके
अरूण मधुरतम गान
बस इतना बता दो कृपानिधान
कब तक बने रहे धैर्यवान।
मुझसे है कैसी रूसवाई
हो रही है अब जग हसाई
मेरे सारे संकल्पों का
प्रभु तुम रखो मान
बस इतना बता दो कृपानिधान
कब तक बने रहे धैर्यवान।
~ प्रज्ञा शुक्ला


