ख़ुद को मत, बेकार समझना ।
तुम हो ,रचनाकार की रचना ।
कष्टों में ,ना हार समझना ।
आशाएं, उम्मीदें रखना ।
पीड़ाओं का, सार समझना ।
जीवन को ना, भार समझना ।
आज नहीं तो, कल जीतोगे ।
खुद को तुम, हर बार परखना ।
टूटा है जो, जुड़ जायेगा ।
खुद को तुम, शिल्पकार समझना ।
जितना भी ,तुमने है पाया ।
ईश्वर का , उपकार समझना ।
मिट जायेंगे, सभी अंधेरे ।
रौशन अपना, संसार समझना।
खुद को मत, बेकार समझना ।