ओ ! नौजवान जागो ।
ओ ! भारत के,
भाग्य विधाता जागो ।
तुम पर ही,
टिकी है आशा ।
करोगे तुम ,
दूर निराशा ।
छाया है जो,अंधियारा ।
अब उसको,

तुरंत मिटा दो ।
जागो ! नवयुवकों जागो !
करो सारी, नष्ट बुराई ।
बिखरा दो ,बस अच्छाई ।
समझ से ,अपने प्रण लो ।
अपने निश्चयों ,पर दृढ़ हो ।
ओ ! राष्ट्र के भाग्य विधाता ।
‌श्रम का ,परचम लहरा दो ।
फ़िर नया ,सवेरा ला दो ।
अब यहां ना ,कोई कमी हो ।
हर घर में, खुशी बसी हो ।
बस इसमें, जान लगा दो ।
जागो नवयुवकों ! जागो !

श्रीमती प्रगति दत्त