उत्पल काया प्रकट हुई,
जब हुआ प्रेम मिलाप,
जल का माटी से |
जब -
बूँद बूँद ठहरी हुई,
घुलती गई कण कण में|
जब -
माटी के एक आकार का,
जल के एक आकार से,
हुआ ये अद्भुत संयोजन |

जब -
मिली सही मात्रा,
ठहराव की,
(बूँद के)
आकार की,
(माटी के)
नमी की,
(दोनों के मिलन के)
समय की,
(प्रकृति के) |

तब -
हुआ उत्पन्न,
नूतन जीवन एक |

जब -
खिली एक कली,
बूँद का आकार लिए,
और
माटी का ठहराव,
नमी प्रेम मिलाप की,
और
गुलाबी निखार समय का,
हर पंखुड़ी में |

प्रदीप्ति

#tulipbrook #lotus #प्रकृति