ये व्यापक मौन,
क्षितिज समुद्र का,
जिसकी सतह पर,
ये ध्वनि लहर सी,
तरंगे बनाती है |
मगर फिर भी ये,
नज़र आता हमेशा,
ठहरा हुआ सा |
कैसी विडंबना है ये,
मानो जैसे -
गति और निस्तब्धता,
दोनों संग - संग हो |
मौन का आकार,
नहीं माप सकता,
कोई सिरा इसका,
नहीं भाँप सकता |
ध्वनि की आकृति,
कोई रेखाचित्र पर रचा,
सीधी, वक्र और अनेक बिन्दुओ से बना,
दृष्टिकोण में समाया,
एक भौतिक रूप लिए,
समय के दायरे से बँधा हुआ |
और ये मौन,
अनुभूति के सूक्ष्म आभास में,
स्थूल सीमाओं को,
धुंधला करता हुआ,
अनंत का अभिन्न भाग,
बनने के लिए,
कालचक्र से परे,
अनंत बनने के लिए |

प्रदीप्ति

#tulipbrook #philosophy #spirituality