इतिहास की झलक दिखती है,
इस इमारत में -
दीवारों की टेड़ी मेढ़ी दरारों में,
कोनों में जमी हरी काली काई में,
पत्थरों की टूटी फूटी पगडंडियों में,
छतों की छिलती गिरती परतों में,
झिल्लीदार निस्तेज इन कमरों में,
बिन शीशे पल्लो की खिड़कियों में,
इमारत के हर भाग, हर हिस्से में,
हर दिशा में खुलते इन रोशनदानों में,
इसकी दशकों पुरानी नींव में,
ईमारत के सम्पूर्ण अस्तित्व में |