इश्क़ में रंज ओ गम और रुसवाई के सिवा

हाथ ना आया कुछ फकत तन्हाई के सिवा ।।

चंद हर्फो में बयां करनी थी मुझे वफाएं तेरी

उम्र-भर कुछ ना लिख पाए रूबाई के सिवा ।।

घर की रौनक ने तेरे साथ ही घर छोड़ दिया

पास अब कोई नही है मेरी परछाई के सिवा ।।