"शबनम पलक को दासताँ उसकी सुना गई"


जाड़े की धूप  रेशमी सपने सजा रही,

संदली व्यथा  उधर भी  गुनगुना रही,

यूं किसी का दूर जाना  गीत बन गया

शबनम पलक को दास्ताँ उसकी सुना रही।

---प्रदीप सेठ सलिल