
बंद दराजों में कर डाला सबने अपना काम,
फिर आ पहुंची शाम।
आसमान ने करवट बदली,
चढ़ा धूप पर रंग,
सड़कों पर आ गई ज़िन्दगी
टूट गये अनुबंध ।
चौपालों पर सिमट विषमता मचा रही कोहराम,
फिर आ पहुंची शाम।
कमरों में सन्नाटा पसरा,
रिश्ते कतरन कतरन,
अब “टीवी” की धार का
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