
'परेशां हूँ के मेरे ग़म तुम्हें ग़मख़्वार न कर दें'
वो ख़्र्वाबों के फ़सानों का ज़माना डूबने को है,
के चश्मे नम के दरिया में ज़माना डूबने को है।
सदां माज़ी की लहरों में भटकता चैन आ जाए,
वो गुज़रे दौर का रौशन ज़माना डूबने को है।
वो देखा ख़्वाब था के इश्क़ से संवरेगी ये दुनिया,
मे
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