सुबह से शाम तक अपनी कहानी याद आती है,

जो अश्कों से लिखी थी वो कहानी याद आती है,

तेरी उन सुर्ख़ आंखों से झलकते थे गरम आँसू,

वो घंटों तक मुलाकातें पुरानी याद आती है।

--प्रदीप सेठ "सलिल"