'वतन के वास्ते मुझे मरना कबूल है'

हर हिन्दवासी का यही पहला असूल है।



बिजली किसी ख़्याल की तड़पा रही है आज,

दर्पण में कोई बिम्ब वो बना रही है आज, 

शायद मेरे मिजाज से वाक़िफ़ वो हो गई

मुझको वतन के वास्ते  बुला  रही है आज।


---प्रदीप सेठ "सलिल"