“मन आपका है प्रियतम”
हर्ष हो या चिन्तन
गूँजेंगे गीत हरदम
वह गीत जो तुम्हारे प्यार ने लिखे हैं।
पंक्ति प्रथम है जिसकी
मन आपका है प्रियतम,
अब आओ है अंधेरा
इस तम से मुक्त कर दो।
जग है कठिन तो होगा
तुम हो तो सब सरल है,
मृत्यु, विरह में मृत्यु
मरना नही अमर है।
मैं दर्द हूँ निरंतर
पीड़ित हूँ मेरे सदके,
फिर भी है हर्ष इतना
दामन में याद तो है।
मजबूरियों का दरिया
सुविधा की क़श्ती जरजर
तुम दूर हो मैं जानूं
निष्ठुर सबल विवशता,
नग़्मे जो मेरी पूंजी
क्षणक्षण मैं गुनगुनाऊं
एलबम विगत की खोले
सपनों से पल सजाऊं,
गुंजित हैं गीत हर पल
वह गीत जो तुम्हारे प्यार ने लिखे हैं।
---प्रदीप सेठ सलिल

