'उन्नति सजी किसी दालान में.....''s image
Love PoetryPoetry1 min read

'उन्नति सजी किसी दालान में.....'

Pradeep Seth सलिलPradeep Seth सलिल November 28, 2022
Share0 Bookmarks 71846 Reads1 Likes


"प्यार की नदी बनी है बूंद सी"

  

कितने गीत दर्द भरे गाऐं हम,

वेदना कभी नही पसीजती, 

उन्नति सजी किसी दालान में,

आंसुओं को बेधड़क खरीदती।


झूलती “हंसी” समय का पालना,

झुनझुना बजा रही विवश घड़ी,

बार बार वक्ष से लगा लिया

फिर भी नकचढ़ी कभी न रीझती।


भविष्य के अंधेरे ब्लैक बोर्ड पर,

समस्या काल-दोष की न हल हुई,

अर्थहीन हो 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts