'तुम्हीं चांदनी चाँद हो मेरा, तुम्हें समर्पित जीवन मेरा'
चाँद चौथ का डाले फेरा,
सजन नही वो कुछ भी मेरा,
तुम्हीं चांदनी चांद हो मेरा,
तुम्हें समर्पित जीवन मेरा।
भाल तिलक गरीमा घर की तुम,
तु्म्हीं दीप हो दीपशिखर तुम,
मैं पुस्तक परिचय तुम मेरा,
तुम्हें समर्पित जीवन मेरा।
तुम पूरब मैं हूँ पुरवाई
तुम दर्पण तुम ही परछाईं,
मैं बंधन तुम सूत्र हो मेरा
तुम्हें समर्पित जीवन मेरा।
अपने सम्बंधों की भाषा
स्नेह समर्पण संचित आशा,
स्वप्न सत्य सब तेरा मेरा,
तुम्हें समर्पित जीवन मेरा।
तुम गीतों ग़ज़लों की काया,
शिल्प,भाव, ने तुम्हें सजाया
तुम्हीं गीत तुम काव्य हो मेरा,
तुम्हें समर्पित जीवन मेरा।
---प्रदीप सेठ “सलिल”

