"दौर के रथ की दिशा पहचान लेना"


आप सावन को नया आयाम देना,

हो सके तो बादलों को थाम लेना।


मन किसी सागर का पर्याय है किन्तु,

स्वप्न-लहरों से नदी का काम लेना।


थक के जो आए किनारे पर तुम्हारे,

अंश तुम अपनी व्यथा का जान लेना।


मुस्कराहट जब किसी चेहरे पे देखो,

तुम तभी नकली का मतलब जान लेना।


एक दिन फुर्सत मिलेगी आपको भी,

दौर के रथ की दिशा पहचान  लेना।

---प्रदीप सेठ “सलिल”