"धूप सी खिलकर खुशी बिखरे सभी के द्वार"
धूप सी खिलकर खुशी बिखरे सभी के द्वार,
स्नेह दीपक से उजाले का करेंं श्रृंगार।
भाव पुष्पों से सजे हर छत्त हर आँगन,
गीत मंगलमय सुनाए प्रीत का हर तार,
पेड़ की यह डाल हो या पेड़ की वह डाल,
रश्मियों से जगमगाए वृक्ष का संसार,
पूर्व हो, पश्चिम हो, उत्तर हो या हो दक्षिण,
हर दिशा में सिन्धु सा हो हर्ष का विस्तार,
मन ने चाहा बांटना प्रकाश की गंगा,
पर विवशता देखिए हूँ एक छोटी धार।
---प्रदीप सेठ सलिल

