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शायरी


लो ये परवाने तेरी महफ़िल में सब कुछ कह गए,खामोश जज़्बातों का मतलब दिल की बातें कह गये।×मोहब्बत का महज़ एक ही मज़हब है जहाँ में,यादों का सिलसिला है इबादत है सनम की।

— प्रदीप सेठ “सलिल”
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