
"रिश्तों में तपिश है यहाँ आकर के देख लें"
सहने चमन में आज वो आकर के देख लें
फूलों का दर्द एक है आकर के देख लें,
बुलबुल किसी के शोर की मोहताज़ नही है
गीतों में वज़ह सोज़ की आकर के देख लें,
बर्फ़ की तरह नही ठण्डा यहाँ का ख़ून
रिश्तों में तपिश है
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