दुनिया का हाल जानिए या कुछ भी कीजिए,
हमसे हमारा हाल भी पूछा तो कीजिए।
गों की बात और है पनघट की बात और,
उल्फ़त की आंधियों में इज़ाफा न कीजिए।
आंचल में ॠतुराज का सौंदर्य बांधकर,
किसी के मन का सब्र यों आंका न कीजिए।
-प्रदीप सेठ "सलिल"


दुनिया का हाल जानिए या कुछ भी कीजिए,
हमसे हमारा हाल भी पूछा तो कीजिए।
गों की बात और है पनघट की बात और,
उल्फ़त की आंधियों में इज़ाफा न कीजिए।
आंचल में ॠतुराज का सौंदर्य बांधकर,
किसी के मन का सब्र यों आंका न कीजिए।
-प्रदीप सेठ "सलिल"