आँसू जो तेरी याद में अल्फ़ाज़ हो गए,
आंचल किसी के ख़्वाब का बारहा भिगो गए,
पतझर से सांझा कर लिया फूलों ने अश्क़ को
शबनम से पुर ज़मीं ओ आसमां भिगो गए।
--प्रदीप सेठ “सलिल”


आँसू जो तेरी याद में अल्फ़ाज़ हो गए,
आंचल किसी के ख़्वाब का बारहा भिगो गए,
पतझर से सांझा कर लिया फूलों ने अश्क़ को
शबनम से पुर ज़मीं ओ आसमां भिगो गए।
--प्रदीप सेठ “सलिल”