मेरी परेशान उम्मीदों को ज़ुबां दे जाओ,
चांद चमका है मेरे चाँद के तुम आ जाओ,
छेड़ती है मुझे रह रह के ये ठन्डी सी हवा
दिल में एक आग सी लगती है के तुम आ जाओ।
तेरी ज़ुल्फ़ों से महक आज भी आती है मुझे,
तेरी नज़रों की चमक दिल को दुखा जाती है,
तेरी बाहों में सिमटना किसी तितली की तरह
ज़िन्दगी आज भी बाहों में कसा चाहती है।
मेरे सपनों के मेरे दिल के हंसी राजकुंवर
मेरा आंचल तुम्हें पाने को तरसता है कभी
मेरे अरमान की यमुना पे बसा ताजमहल
तेरे दीदार की पूनम को तरसता है कभी।
रात में झूमती गाती हुई पत्तों की सदा
तेरे ख़ामोश इशारों को बुला लाती है
आँख कुछ दूर किसी पेड़ की शाख़ों के तले
तेरे नक़्शों में नज़ाकत की झलक पाती है
जब कभी प्यार में खोए हुये पक्षी पे नज़र
याद में तेरी, सिसकते हुए पड़ जाती है,
आँख रोती है तो वो उष्ण मिलन की बातें
अश्क की बूंद बनी गीत ओ ग़ज़ल गाती है।
मेरे चेहरे की चमक चाँद मेरे आ जाओ
फूल खिलते हैं चमन में के सनम आ जाओ,
दिन भी लम्बे हैं सनम रात भी बुझती बुझती
टिमटिमाता है दिया दिल का सनम आ जाओ।
---प्रदीप सेठ “सलिल”

