मन
ऐसा भी
ज़िन्दगी
काग़ज़
आंसू
स्याही
ग़म
गीत
शब्द
सिसकी
इंतज़ार
सब्र
ख़ुश महोत्सव
कभी तो।
---प्रदीप सेठ “सलिल”