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पेड़ों की बस्तियों में कत्लेआम हो गया'



पेड़ों की बस्तियों में  क़त्लेआम हो गया,

काजल किरण के शहर का निज़ाम हो गया,

सुबह किसी के हुक़्म की पाबंद नही पर,

परछाईयों में इसका चलन आम हो गया।


--प्रदीप सेठ "सलिल"