"शेष पृष्ठ पर शबनम ने सहरा से रास रचाया"


क़ागज़ के कोने पर मैंने अक्षर एक सजाया

शेष पृष्ठ पर शबनम ने सहरा से रास रचाया,

अंतस की चौखट पर बूंदें दबे पाँव चल आयीं

जेठ मास की अनुभूति पर सावन घिर कर आया।

--प्रदीप सेठ सलिल