
"बित्ता बित्ता रिक्तता से"
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विश्राम चाहिए
औपचारिकता से
लचर व्यवहारिकता से,
उस से
डर लगा
जो अपना लगने लगा,
गली में मोहल्ले में बाजार में शहर में
सदी के इस पहर में,
हर आदमी
जिसने प्यार से देखा
तारीफ़ की
नफ़रत दिखाई,
छुआ-
धुंआ जादू तसव्वुर परछाईं,
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