हैं समर्पित आज तुमको भावनाएँ

शुभकामनाएँ।


यह समुंदर सा समय का

क्रम

है उजाले का मधुर नव क्षण,

हों तुम्हें अर्पित समय की वन्दनाएं

शुभकामनाएँ।


प्रातः की पहली किरण के पग

हैं तुम्हारे जो बनें व्यापक,

पल्लवित होती रहें सब

भावनाएँ,

शुभकामनाएँ।


हो गगन सा ज्ञान-अंकुर

ध्वनिमय हो हर्ष नूपुर    

उन्नति-खग चहचहाएँ

शुभकामनाएँ।

---प्रदीप सेठ सलिल