'खेतों मे खुशहाली पसीना दे के हम बोते'
सहने चमन में आज वो आकर के देख लें
गीतों में वज़न सोज़ की आकर के देख लें,
खेतों में खुशहाली, पसीना दे के हम बोते
जज़बात की ज़मीन को आकर के देख लें,
---प्रदीप सेठ सलिल


'खेतों मे खुशहाली पसीना दे के हम बोते'
सहने चमन में आज वो आकर के देख लें
गीतों में वज़न सोज़ की आकर के देख लें,
खेतों में खुशहाली, पसीना दे के हम बोते
जज़बात की ज़मीन को आकर के देख लें,
---प्रदीप सेठ सलिल