एक स्वप्न के बस जाने से मौसम कितना बदल गया है,

फूल समर्पण में बिखरे और कलियों ने सत्कार किया है।

मेंह बरस कर  सूने आंगन  अठखेली  करने आया है ,

अंबर ने व्याकुल हो कर के किसी बूंद से प्यार किया है ।


-प्रदीप सेठ "सलिल"