'सखी स्नेहिल गीत बनाना'


मेरे कमसिन गीतों की

लय से लय सखी मिलाना,

जग जब जब नींद संजोए

निष्ठुर मन को बहलाना,

सखी स्नेहिल गीत......।


सावन सा नैन निरंतर

जो रिमझिम रिमझिम बरसें,

कर याद मिलन की बातें

नयनों से रस बरसाना,

सखी स्नेहिल गीत......।


जब गत युग के दर्पण में

दो पक्षी आकर बैठें,

विरहन को गीत सुनाना

दर्पण से नेह चुराना,

सखी स्नेहिल गीत......।


उपवन में कलि खिले तो

मेरी मुस्कान मिले तो,

अधरों से प्रीत जताना

फिर मन ही मन सकुचाना,

सखी स्नेहिल गीत......।


--प्रदीप सेठ “सलिल”