
'भोर की पहली किरण तुमसे है काम'
भोर की पहली किरण तुमसे है काम
रात के अलसाए सागर से निकल कर
जब सुबह उस द्वार पहुँचो
अरगनी पर टांगना खुशियाँ
किसी के नाम,
भोर की पहली किरण तुम से है काम
पौष की ठण्डी हवाओं
जब परिंदे गीत गाऐं
वृक्ष डालों को झुलाऐं
उस समय तुम गुनगुनाना
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