
दर्द का अपना सफर कुछ इस तरह तय कर लिया,
ज्यों किसी बसन्त ने पतझर से दामन भर लिया।
अतीत की जाली से छनकर कल के किस्से आ रहे,
इक फ़सल काटी औ’ दामन दूसरी से भर लिया।
बर्फ़ की तरह पिघलना था किसी के प्यार का,
और किसी खारे समुन्दर न
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